Maharana Pratap
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Maharana Pratap

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Maharana Pratap Facts

> Maharana Pratap ki mataji ka naam Maharani Saheba Hukum Jaivantibaiji Chauhan Mewar tha. > Yeh Mewar Maharanisa hukum Chauhan kul ke the or Sonigara shakha ke Pali ke Maharaj Akheraj ji Chauhan ke suputri the. > Maharana Udai Singhji ke devgaman per Akherajji Chauhan ne Salumber ke Rawat Krishnadasji Chundawat ko unke dharm ki yaad dilate huye Maharana Pratap ko gaddi pe bithane ka nivedan kiya aur Jagmalji ko kul me anushasan banaye rakhne ke liye prerit kiya. > Maharana Pratap ke Mama ka naam Maan Singhji Chauhan Sonigara tha jo apne Bhanej ki raksha me Dillipatipati Akbar ke adesh se bheji gayi lagbhag sampurn bharat ki riyasato ki shamil sena ke viruddh Mewari Fauj me rehkar Haldighati me ladte huye shaheed ho gaye the.

महाराणा प्रताप

[caption id="attachment_4192" align="alignleft" width="277"] Maharana Pratap[/caption] मुगल काल में पैदा हुआ वो बालक कहलाया राणा होते जौहर चित्तौड़ दुर्ग फिर बरसा मेघ बन के राणा हरमों में जाती थीं ललना बना कृष्ण द्रौपदी का राणा रौंदी भूमि ज्यों कंस मुग़ल बना कंस को अरिसूदन राणा छोड़ा था साथियों ने भी साथ चल पड़ा युद्ध इकला राणा चेतक का पग हाथी मस्तक ज्यों नभ से कूद पड़ा राणा मानसिंह भयभीत हुआ जब भाला फैंक दिया राणा देखी शक्ति तप वीर व्रती हाथी भी कांप गया राणा चहुँ ओर रहे रिपु घेर देख सोचा बलिदान करूँ राणा शत्रु को मृगों का झुण्ड जान सिंहों सा टूट पड़ा राणा देखा झाला यह दृश्य कहा अब सूर्यास्त होने को है सब ओर अँधेरा बरस रहा लो डूबा आर्य भानु राणा गरजा झाला के भी होते रिपु कैसे छुएगा तन राणा ले लिया छत्र अपने सिर पर अविलम्ब निकल जाओ राणा हुंकार भरी शत्रु को यह मैं हूँ राणा मैं हूँ राणा नृप भेज सुरक्षित बाहर खुद बलि दे दी कह जय हो राणा कह नमस्कार भारत भूमि रक्षित करना रक्षक राणा! चेतक था दौड़ रहा सरपट जंगल में लिए हुए राणा आ रहा शत्रुदल पीछे ही नहीं छुए शत्रु स्वामी राणा आगे आकर एक नाले पर हो गया पार लेकर राणा रह गए शत्रु हाथों मलते चेतक बलवान बली राणा ले पार गया पर अब हारा चेतक गिर पड़ा लिए राणा थे अश्रु भरे नयनों में जब देखा चेतक प्यारा राणा अश्रु लिए आँखों में सिर रख दिया अश्व गोदी राणा स्वामी रोते मेरे चेतक! चेतक कहता मेरे राणा! हो गया विदा स्वामी से अब इकला छोड़ गया राणा परताप कहे बिन चेतक अब राणा है नहीं रहा राणा सुन चेतक मेरे साथी सुन जब तक ये नाम रहे राणा मेरा परिचय अब तू होगा कि वो है चेतक का राणा! अब वन में…

क्या आप जानते हैं

[caption id="attachment_4088" align="alignright" width="192"] Maharana Pratap[/caption] FACTS ABOUT MAHARANA PRATAP ( क्या आप जानते हैं ) * महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोडा समेत दुश्मन सैनिको को काट डालते थे *जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे तब उन्होने अपनी  माँ से पूछाकी हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर अाए । तब माँ का जवाब मिला " उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्टी धूल लेकरआना जहा का राजा अपने प्रजा के प्रति इतना वफ़ा दार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले आपनी मातृभूमि को चुना " बद किस्मत से उनका वो दौरा रदद्ध हो गया था।  "बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ' किताब में आप ये बात पढ़ सकते है। .. *महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलो था और कवच का वजन 80 किलो  कवच ,भाला, ढाल,और हाथ मे तलवार का वजन मिलाये तो 207 किलो *आज भी महा राणा प्रताप कि तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रालय में सुरक्षित है *अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है तो आदा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहट अकबर ही रहेगी *हल्दी घाटीकी लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर कि और से 85000 सैनिक युध्ध में समलित हुए *राणाप्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना जो आज हल्दी घटी में सुरक्षित है *महाराणा ने जब महलो का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगो ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फोज के लिए तलवारे बनायीं इसी समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गड़लिया लोहार कहा जाता है नमन है ऐसे लोगो को *हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वह जमीनो में तलवारे पायी गयी। आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 हल्दी घाटी के में मिला *महाराणा प्रताप अस्त्र शत्र कि शिक्सा जैमल मेड़तिया ने दी थी जो 8000 राजपूतो को लेकर 60000 से लड़े थे। उस…

Rana Pratap

शूरवीर महाराणा प्रताप [caption id="attachment_2922" align="alignleft" width="384"] MAHARANA PRATAP - THE FIRST FREEDOM FIGHTER[/caption] राजपूतों की सर्वोच्चता एवं स्वतंत्रता के प्रति दृणसंक्लपवान वीर शासक एवं महान देशभक्त महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। महाराणा प्रताप अपने युग के महान व्यक्ति थे। उनके गुणों के कारण सभी उनका सम्मान करते थे।ज्येष्ठ शुक्ल तीज सम्वत् (9 मई )1540 को मेवाड़ के राजा उदय सिंह के घर जन्मे उनके ज्येष्ठ पुत्र महाराणा प्रताप को बचपन से ही अच्छे संस्कार, अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान और धर्म की रक्षा की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली। राजपूतों की सर्वोच्चता एवं स्वतंत्रता के प्रति दृणसंक्लपवान वीर शासक एवं महान देशभक्त महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। महाराणा प्रताप अपने युग के महान व्यक्ति थे। उनके गुणों के कारण सभी उनका सम्मान करते थे।ज्येष्ठ शुक्ल तीज सम्वत् (9 मई )1540 को मेवाड़ के राजा उदय सिंह के घर जन्मे उनके ज्येष्ठ पुत्र महाराणा प्रताप को बचपन से ही अच्छे संस्कार, अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान और धर्म की रक्षा की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली। सादा जीवन और दयालु स्वभाव वाले महाराणा प्रताप की वीरता और स्वाभिमान तथा देशभक्ति की भावना से अकबर भी बहुत प्रभावित हुआ था। जब मेवाङ की सत्ता राणा प्रताप ने संभाली, तब आधा मेवाङ मुगलों के अधीन था और शेष मेवाङ पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिये अकबर प्रयासरत था।राजस्थान के कई परिवार अकबर की शक्ति के आगे घुटने टेक चुके थे, किन्तु महाराणा प्रताप अपने वंश को कायम रखने के लिये संघर्ष करते रहे और अकबर के सामने आत्मसर्मपण नही किये।जंगल-जंगल भटकते हुए तृण-मूल व घास-पात की रोटियों में गुजर-बसर कर पत्नी व बच्चे को विकराल परिस्थितियों में अपने साथ रखते हुए भी उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया। पैसे के अभाव में सेना के टूटते हुए मनोबल को पुनर्जीवित करने के लिए दानवीर भामाशाह…

STORY OF RANA PRATAP IN HINDI PDF

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